Rachna Sharir Mahendra Singh pdf download
Rachna Sharir Mahendra Singh pdf download
Rachana Sharir book PDF Download
Rachana sharir Vigyan Dr Mahendra Singh pdf
Rachana Sharir book PDF Download||Rachna Sharir Mahendra Singh pdf download |Rachana sharir Vigyan Dr Mahendra Singh pdf download |Rachna Sharir book PDF Download |Rachana Sharir book pdf Free download |रचना शारीर महेंद्र सिंह Book pdf Part-1 Download pdf free | Rachna Sharir Vijnana Vol. 1 (First Paper) | Sharir Rachna Tatha Sharir Kriya Vigyan.
![]() |
| Rachna Sharir Mahendra Singh pdf download |
What is रचना शारीर or शारीर रचना विज्ञान?
शारीरिकी, शारीर या शरीररचना-विज्ञान , जीव विज्ञान और आयुर्विज्ञान की एक शाखा है जिसके अंतर्गत किसी जीवित (चल या अचल) वस्तु का विच्छेदन कर, उसके अंग प्रत्यंग की रचना का अध्ययन किया जाता है। अचल में वनस्पतिजगत तथा चल में प्राणीजगत का समावेश होता है और वनस्पति और प्राणी के संदर्भ में इसे क्रमश: पादप शारीरिकी और जीव शारीरिकी कहा जाता है। जब किसी विशेष प्राणी अथवा वनस्पति की शरीररचना का अध्ययन किया जाता है, तब इसे विशेष शारीरिकी (अंग्रेजी:Special Anatomy) अध्ययन कहते हैं। जब किसी प्राणी या वनस्पति की शरीर रचना की तुलना किसी दूसरे प्राणी अथवा वनस्पति की शरीर रचना से की जाती है उस स्थिति में यह अध्ययन तुलनात्मक शारीरिकी (अंग्रेजी:Comparative Anatomy) कहलाता है। जब किसी प्राणी के अंगों की रचना का अध्ययन किया जाता है, तब यह आंगिक शारीरिकी कहलाती है।
आकारिकीय शरीररचना विज्ञान (Morphological Anatomy) की दृष्टि से मानवशरीर के भीतर अंगों की उत्पत्ति के कारणों का ज्ञान, अन्वेषण का विषय बन गया है। इस ज्ञान की वृद्धि के लिए भ्रूणविज्ञान (Embryology), जीवविकास विज्ञान, जातिविकास विज्ञान एवं ऊतक विज्ञान (Histo-anatomy) का अध्ययन आवश्यक है।
स्वस्थ मानव शरीर की रचना का अध्ययन निम्न भागों में किया जाता है:
- चिकित्साशास्त्रीय शरीररचना विज्ञान,
- शल्यचिकित्सा शरीररचना विज्ञान (Surgical Anatomy),
- स्त्री शरीर विशेष रचना विज्ञान,
- धरातलीय शरीररचना विज्ञान (surface Anatomy),
- सुक्ष्मदर्शीय शरीररचना विज्ञान (Microscopic Anatomy) तथा
- भ्रूण शरीररचना विज्ञान (Embryology)।
विकृत अंगों की रचना के ज्ञान को विकृत शरीररचनाविज्ञान (Pathological Anatomy) कहते हैं।
मानव की विभिन्न प्रजातियों की शरीररचना का जब तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है, तब मानवविज्ञान (Anthropology) का सहारा लिया जाता है। आजकल शरीररचना का अध्ययन सर्वांगी (systemic) विधि से किया जाता है।
ईसा से 1,000 वर्ष पूर्व महर्षि सुश्रुत ने शवच्छेद कर शरीररचना का पर्याप्त वर्णन किया था। धीरे-धीरे यह ज्ञान अरब और यूनान होता हुआ यूरोप में पहुँचा और वहाँ पर इसका बहुत विस्तार एवं उन्नति हुई। शव की संरक्षा के साधन, सूक्ष्मदर्शी, ऐक्सरे आदि के उपलब्ध होने पर शरीररचना विज्ञान का अध्ययन अधिक सूक्ष्म एवं विस्तृत हो गया है। शरीर रचना की सबसे छोटी इकाई कोशिका है। बहुत सी कोशिकाएँ मिलकर ऊतक बनते हैं; एक या अनेक प्रकार के ऊतकों से अंग बनते हैं; कई अंग मिलकर एक तंत्र बनाते हैं। शरीर कई तन्त्रों का समूह है।
Book description of Rachana Sharir book PDF Download
- Author: डॉ. महेन्द्र सिंह (Dr. Mahendra Singh)
- Cover: paperback
- Edition: 2016
- Publisher: Chaukhambha
- Language: English and Hindi
- Size: 8.5 inch X 5.0 inch
- Pages: 956 (Throughout B/W Illustrations)
- PDF size : 44.8 MB


Post a Comment