Panchatantra Aparikshitkarakam पंचतंत्रअपरीक्षितकारक
पञ्चतन्त्रम्: Panchatantra (Apariksit Karaka)
Panchatantra Aparikshitkarakam पंचतंत्रअपरीक्षितकारक
पञ्चतन्त्रम्: Panchatantra (Apariksit Karaka) pdf download
संस्कृत नीतिकथाओं में पंचतंत्र का पहला स्थान माना जाता है। यद्यपि यह पुस्तक अपने मूल रूप में नहीं रह गयी है, फिर भी उपलब्ध अनुवादों के आधार पर इसकी रचना तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के आस-पास निर्धारित की गई है। इस ग्रंथ के रचयिता पंडित विष्णु शर्मा हैं, कहीं-कहीं रचयिता का नाम 'बसुभग' आया है।
उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर कहा जा सकता है कि जब इस ग्रंथ की रचना पूरी हुई, तब उनकी उम्र लगभग ८० वर्ष थी। पंचतंत्र को पाँच तंत्रों (भागों) में बाँटा गया है:
- मित्रभेद (मित्रों में मनमुटाव एवं अलगाव)
- मित्रलाभ या मित्रसंप्राप्ति (मित्र प्राप्ति एवं उसके लाभ)
- काकोलुकीयम् (कौवे एवं उल्लुओं की कथा)
- लब्धप्रणाश (हाथ लगी चीज (लब्ध) का हाथ से निकल जाना (हानि))
- अपरीक्षित कारक (जिसको परखा नहीं गया हो उसे करने से पहले सावधान रहें ; हड़बड़ी में कदम न उठायें)
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| Panchatantra Aparikshitkarakam पंचतंत्रअपरीक्षितकारक |
Book description :
- Author : Pandit vishnu sharma | पंडित विष्णु शर्मा
- Language : Hindi and Sanskrit
- Publisher : Chaukhambha prakashan
- Subject : Sanskrit
- Course : BAMS
- Pages : 38
- File size : 6.9MB
- Download availability : available for all


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